Dainik Bhaskar

Dec 02, 2019, 01:42 PM IST

बॉलीवुड डेस्क. रितेश देशमुख हाल ही में दो फिल्मों ‘हाउसफुल 4’ और ‘मरजावां’ में नजर आए थे। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही फिल्मों को लेकर कहा जाता है कि ये मास ऑडियंस के लिए बनी हुई फिल्में हैं। रितेश ने इन दोनों फिल्मों के बचाव में अपनी दलील खासतौर पर दैनिक भास्कर से शेयर कीं। 

‘हाउसफुल 4’ क्रिटिक्स और सिनेमा के जानकारों को पसंद नहीं आई? क्या कहेंगे

  1. इसमें कोई दो राय नहीं है कि ‘हाउसफुल 4’ बहुत सारे क्रिटिक्स को पसंद नहीं आई। सोशल मीडिया पर भी फिल्म को लेकर एक किस्म की नेगेटिविटी देखने को मिली। मैं फिल्मी समीक्षाओं का सम्मान करता हूं। मगर हमें यह भी देखना होगा कि हमने जिस कैटेगरी के ऑडियंस को ध्यान में रखते हुए फिल्म बनाई थी, उन्हें तो फिल्म पसंद आई है। अगर फिल्म के जानकार और उस टारगेट ऑडियंस की सोच फिल्म को लेकर मैच कर रही होती तो फिल्म को तो क्रैश हो जाना चाहिए था। वैसा नहीं हुआ। तमाम नेगेटिव ओपिनियंस के बावजूद फिल्म डेढ़ सौ करोड़ का कलेक्शन कर गई। अगर यह ऑडियंस को पसंद नहीं आई होती तो डेढ़ सौ करोड़ तो छोड़िए पहले दिन के बाद ही इसके कलेक्शन में गिरावट आ जाती।

  2. ‘मरजावां’ के लिए सिंगल स्क्रीन की ऑडियंस टारगेट थी या मल्टीप्लैक्स की?

    इस फिल्म को लेकर हम शुरू से ही जानते थे कि यह मास ऑडियंस के लिए बनाई जा रही है। हमारा टारगेट सिंगल स्क्रीन वाले लोग थे। वह भी भारत के सिंगल स्क्रीन। भारत के सिंगल स्क्रीन में आने वाली ऑडियंस का टेस्ट अलग होता है। उन्हें अलग तरह की फिल्में पसंद आती हैं। हमारा फोकस उसी तरह की ऑडियंस थी। वैसा हुआ भी। 70 फीसदी सिंगल स्क्रीन पर इसका 50 करोड़ का कलेक्शन है। इस तरह देखा जाए तो हम लोगों ने इन दोनों फिल्म के लिए जिन-जिन को टारगेट किया था उन्हें फिल्म पसंद आई।

  3. ‘सत्यमेव जयते’ और ‘मरजावां’ के कलेक्शन को कैसे जस्टिफाई करेंगे?

    हमने पूरी तरह सिंगल स्क्रीन पर ही जोर लगाया। जहां पर टिकट की कीमतें 100 रुपए के अंदर ही होती है। मैं फिगर नहीं दे रहा लेकिन मल्टीप्लेक्स की ऑडियंस को इस रेशियो में ऐड कर लिया जाए तो इसका इवैल्युएशन 100 करोड़ क्लब की किसी फिल्म से कम नहीं है।



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