‘मुझे बचाओ, मैं मरना नहीं चाहती, मैं उन्हें फांसी पर लटकते देखना चाहती हूं’ ये अंतिम शब्द थे उत्तर प्रदेश के उन्नाव की उस 23 वर्षीय बेटी की जिसे गुरुवार यानी 5 दिसंबर की सुबह मिट्टी का तेल डालकर जला दिया गया. जलाए जाने के 65 घंटे बाद जब रेप पीड़िता का शव उसके घर पहुंचा तो पूरा गांव गमगीन था.  वो करीब 43 घंटे तक जीवन से संघर्ष किया, लेकिन शुक्रवार रात 11 बजकर 40 मिनट पर हार गई और मौत के मुंह में समा गई.

गुरुवार सुबह 4 बजे जलाई गई थी पीड़िता

गुरुवार की सुबह 4 बजे उन्नाव गैंगरेप पीड़िता दुष्कर्म के मामले में होने वाली सुनवाई के लिए रायबरेली की एक अदालत जाने के लिए निकली थी. उसे उन्नाव के बैसवारा बिहार रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़ना था. इसी दौरान उस पर दरिंदों हमला किया और प्रेट्रोल डालकर आग के हवाले कर दिया और मरने के लिए छोड़ दिया.

इन सबके बावजूद वह खड़ी हुई और एक किलोमीटर तक चलकर एक व्यक्ति के पास पहुंची, जो एक घर के बाहर काम कर रहा था. पीड़िता ने उससे मदद मांगी और उसने खुद पुलिस को फोन किया. इसके बाद उसे नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे लखनऊ के सिविल अस्पताल में रेफर कर दिया गया. वहां प्लास्टिक सर्जरी बर्न यूनिट में भर्ती कर पीड़िता का बयान दर्ज किया गया. अपने बयान में उसने सभी पांचों आरोपियों के नाम लिए.

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शुक्रवार की रात दिल्ली में तोड़ा दम

दुष्कर्म के आरोपियों सहित 5 लोगों द्वारा कथित रूप से जलाए जाने के बाद पीड़िता को एयर एंबुलेंस के जरिए लखनऊ से दिल्ली लाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वह 90 फीसदी जल चुकी थी. वो हृदयाघात से बच नहीं सकी और उसे शुक्रवार रात 11:40 बजे मृत घोषित कर दिया गया. इस तरह करीब 44 घंटे जीवन से लड़ने के बाद वो हार गई. अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने कहा, ‘वह दर्द में थी. वह खुद को बचाने की गुहार लगा रही थी.’

जलाए जाने के करीब 65 घंटे बाद शनिवार रात 9 बजे पीड़िता का शव एम्बुलेंस के जरिए उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले स्थित उसके गांव पहुंचा. उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के भाई ने शनिवार को कहा, ‘उसकी बहन को तभी न्याय मिलेगा, जब सभी आरोपियों को वहीं भेजा जाएगा, जहां वह चली गई.’

उन्होंने कहा, ‘उसने मुझसे कहा था, भाई मुझे बचा लो. लेकिन मैं दुखी हूं कि उसे बचा नहीं सका. आरोपियों को या तो मुठभेड़ में मार गिराया जाना चाहिए या फांसी देनी चाहिए. उन्हें जिंदा रहने का अधिकार नहीं है.’

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पीड़िता के परिजनों को 25 लाख रुपये देगी योगी सरकार

उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की मौत के बाद योगी सरकार ने शनिवार को उसके परिवार को बतौर मुआवजा 25 लाख रुपये देने का ऐलान किया. साथ ही सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत परिवार को एक घर और मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने का आश्वासन दिया है.

छिपाकर आरोपियों का हुआ मेडिकल

आक्रोश के चलते शुक्रवार को पुलिस ने अरोपियों को छिपाकर पीएचसी से मेडिकल करवाया. फिर कोर्ट में पेश किया. अब सभी आरोपी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में हैं. मामले में गांव की प्रधान के पति और बेटे को भी आरोपी बनाया गया है.

गांव वालों के अनुसार, दोनों परिवारों में दो साल पहले तक बहुत मधुर संबंध थे. पीड़ित परिवार का संबंध गांव के प्रधान से भी अच्छा था.

खुद पीड़ित लड़की के पिता इस बात को बताते हैं कि प्रधान परिवार उनकी काफी मदद करता था और सरकारी योजनाओं का लाभ भी आसानी से मिल जाता था. लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबंध खराब हो गए. 18 जनवरी 2018 को रायबरेली कोर्ट में पीड़िता और आरोपित शिवम त्रिवेदी ने शादी के अनुबंध पर हस्ताक्षर किया था.

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शिवम ने शादी के बाद छोड़ दिया था साथ

अनुबंध में लिखा गया था कि शादी के बाद वह लड़की का पूरा ख्याल रखेगा. उसे हर्जा, खर्चा देगा. उसके भरण-पोषण की जिम्मेदारी शिवम की है. अनुबंध के कुछ दिन बाद ही सारी कसमें टूट गई. पीड़िता को अकेला छोड़कर शिवम चला गया. उसके बाद, पीड़िता ने अपना हक मांगा तो उसने धमकी दी गई. गांव में पंचायत हुई तो शिवम के घरवालों ने पीड़िता पर दबाव बनाया कि रुपये ले लो और शिवम को छोड़ दो.

लड़की की भाभी बताती हैं, “दोनों ने कब शादी की थी, इसकी जानकारी उन्हें नहीं थी. हम लोगों को शादी के बारे में तब पता चला, जब लड़के ने यहां पर लड़ाई-झगड़ा किया था. तब लड़की ने बताया कि उसने कोर्ट में शिवम से शादी की है, लेकिन अब वह उसे मानने से इनकार कर रहा है.”

क्या बोली उन्नाव रेप कांड के आरोपी की मां?

उधर आरोपी शिवम की मां ने कहा, “न मेरे बेटे ने शादी की, न ही इस घटना में शामिल था, उसे तो सिर्फ फंसाया जा रहा है.”

इस मामले में गांव की प्रधान शांति देवी ने कहा, “मेरे पति और बेटे को राजनीति के कारण फंसाया जा रहा है. वह निर्दोष हैं. इस मामले की चाहे जो एजेंसी जांच कर ले.”

गांव के एक बुजुर्ग ने कहा कि यहां कई दशक में ऐसी घटना नहीं हुई. उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को पता नहीं क्या हो गया है. थोड़ी सी बात पर मरने-मारने को तैयार हो जाते हैं. मामला शांति से सुलझाया जा सकता था.

आईजी कानून व्यवस्था प्रवीण कुमार ने बताया, “पीड़िता के बयान के आधार पर सभी पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है. सारे साक्ष्य एकत्र कर लिए गए हैं. हमें जल्द से जल्द वास्तविक दोषियों का पता लगाना है.”

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