• शाह ने कहा, लाखों-करोड़ों शरणार्थियों के लिए है यह बिल
  • नागरिकता बिल को लेकर भ्रांति फैलाई जा रही है: शाह

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को भारत को धर्म के आधार पर विभाजित करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला किया. उन्होंने बताया कि कैसे 70 साल में पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यक लगातार घटते गए, जबकि भारत में इनकी संख्या बढ़ती गई. गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता कानून 1955 में संशोधन के लिए पेश किए गए विधेयक पर हो रही बहस के दौरान यह टिप्पणी की. बता दें कि लोकसभा से नागरिकता संशोधन बिल पास हो गया है. इस बिल के पक्ष में 311 और विपक्ष में 80 वोट पड़े.

बहस के दौरान अमित शाह ने कहा, लाखों-करोड़ों शरणार्थियों के लिए यह बिल है जो नरक का जीवन जी रहे हैं. मुझे बहुत आनंद है कि लाखों-करोड़ों शरणार्थी जो भारत के प्रति श्रद्धा रखते हैं, बिल के माध्यम से उनको सुरक्षा मिलेगी. बिल के बारे में भ्रांति फैलाई जा रही है उसको दूर करना चाहूंगा.

अमित शाह ने कहा, मनीष तिवारी और शशि थरूर और बाकी लोगों ने आर्टिकल 14 का हवाला देते हुए इस बिल को गैर संवैधानिक करार दिया है. रीज़नेबल क्लासिफिकेशन के आधार पर कानून बनाने से कोई रोक नहीं है. अच्छा तो यह था कि देश का विभाजन धर्म के आधार पर नहीं होता. अगर ऐसा नहीं होता तो मुझे बिल लाने की जरूरत ही नहीं थी. बांग्लादेश अलग से बना. नेहरू लियाकत समझौता हुआ कि दोनों देश अपने अल्पसंख्यकों का ध्यान रखेंगे. मगर यह समझौता धरा का धरा रह गया.

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, पाकिस्तान के अनुच्छेदों में पाकिस्तान राज्य का धर्म इस्लाम है. बांग्लादेश का राज धर्म इस्लाम है. इसको मान्यता वहां के देश ने दी है. पाकिस्तान में 1947 में अल्पसंख्यकों की आबादी 23 फीसदी थी, जो 2011 में घटकर कुछ 3 फीसदी हो गई. बांग्लादेश में 1947 में अल्पसंख्यकों की आबादी 22 फीसदी थी जो 2011 में घटकर7 प्रतिशत हो गई. या तो उनका धर्म परिवर्तन हो गया या भारत में आए या प्रताड़ित कर उन्हें भगा दिया गया.  

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